Saturday, May 14, 2011

सब खोया तो

मैं तो तुझ पर
रग रग से प्यार लुटा चुका था
सब खोया तो मालूम हुआ
तेरे सीने में
दिल ही नहीं था!!!  

22 comments:

  1. नहीं,नहीं देवन्द्र जी,दिल जब आपने चुरा लिया था,तो वह सीने में कैसे रहता जी.
    प्यार तो लूटने और खोने का ही नाम है,सीने में दिल थोड़े ही ना ढूँढता है.खोने के बाद होश कैसा ?

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  2. सुंदर अभिव्यक्ति।

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  3. gar aapke paas vo dil hota jo samajhta,to shayad aap unke liye ye na kehte jinke liye aap kehte firte hain aapne sab loota diya......:):)

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  4. behad khubsurat prastuti....namaskar

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  5. वाह वाह अच्छी लगी , मुबारक हो

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  6. pyar sirph pane ka hi nam nahi hai pyar ki shuruaat hi tab hoti hai jab usme lene ki chahat hi na ho

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  7. प्रेम के कितने ही रंग और कितने ही विम्ब आपने दिए हैं...

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  8. कुछ ऐसा है
    जो
    शब्दों को
    काव्य बना पा रहा है ... !

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  9. बहुत अच्छा लिखा है आपने बहुत सुन्दर!
    आप ने 'मगन' कर दिया मन को.
    आपको मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं !!

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  10. वाह! क्या बात है! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुती !

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  11. devendra ji
    in chooti panktiyon me dil ke gahre jajbaat ubhar aaye hain
    bahut khoob
    Wah ! Wah
    poonam

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  12. दिल पर घातक चोट करती पंक्तियाँ....

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  13. सब खोया तो मालूम हुआ
    तेरे सीने में
    दिल ही नहीं था!!!


    ओए होयेऽऽ…
    सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया … :)

    "Man without Brain" यार ! क्या लिखते हो … झकास्स !

    दानिश जी ने कह दिया न! लगे रहो !
    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  14. short and sweet bt full of meaning !!

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