Thursday, August 1, 2013

​टांग थ्योरी :) (व्यंग)

​बस अभी पंद्रह मिनट पहले की ही बात है. बरसात के बाद सिन्धु घाटी सभ्यता कालीन दिखती सड़कों, जिस पर गड्ढों में पानी और कीचड जम जाता है,​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​  मैं पैर साधते हुए और पाजामा बचाते हुए गुज़र ​​​​रहा था​.   तभी एक महानुभाव दुपहिया  फटफटिया फर्राटे से दौडाते हुए निकल ​​ गये, मानो शोएब अख्तर से तेज़ सड़क पर उड़ना  चाहते हों​​. विज्ञान के सिद्धांत के मुताबिक ​​ कीचड उछलकर मेरे एक ​​​पैर के पायजामे पर  काले रंग से दुनिया के छोटे बड़े देशों ​​​​​​​ के मानचित्र बना  गया ​​. एक पैर की सफेदी और दुसरे पैर की रंगीन पिच को देख दस कदम दूर खड़े होकर  वही महानुभाव ​​​​​​​​ मंद-मंद मंदबुद्धि जीव की तरह मुस्कुरा रहे​​​  थे. मुस्कुराएंगे भी क्यूँ नहीं?​​​​  दूसरों पर कीचड उछालने ​  में आनंद लेना​  तो मानव का प्रथम मौलिक कर्तव्य है. 
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​ मैंने उसकी जले पर नमक छिड़कती हंसी पर आत्म नियंत्रण करते हुए उनसे पूछ ही लिया-बंधू! आपने मेरी एक ही तो टांग खराब  की है, दूसरी भी सलामत है और पूरा बदन  भी​​. फिर सिर्फ एक टांग पर ही ​जिद्दी दाग लगाकर क्यूँ मुस्कुरा रहे हो?

​महानुभाव ने फ़रमाया-जनाब! मैं आपकी टांग की दुर्दशा पर नहीं, टांग थ्योरी पर मुस्कुरा रहा हूँ​. आप भी सुनेंगे ​ तो गुस्सा  थूंक ​देंगे। ​ मैंने कहा- फरमाइए! क्यों ​ न शुरुआत आप ही से की जाए !​ महानुभाव बोले ​ -जनाब ​!टांग थ्योरी पवार का प्रतीक है. जिसकी जितनी मजबूत  टांग वह उतना ही पावरफुल। अगर आपकी टांग मजबूत है तो आप कहीं भी टांग अड़ा सकते हैं. अच्छे -​ ​​​​  खासे धावक​ को गिरा​ सकते हैं​. जो आपसे पीछे है उसे टांग लगाकर  रोक सकते ​हैं​. टांग  की बदौलत ही ओलम्पिक जैसे नामी ​ खेलों में पदक जीते जाते है. टांग से ही क्रिकेट में नो बॉल फेंककर आप मैच गंवा सकते ​ है. आपकी एक टांग न हो तो विकलांग का दर्जा  पाकर अच्छी नौकरी पा​​​​​​​​ सकते है. टांग उचित आकर की हो तो ब्रांडेड जूता पहन​ सकते हैं और मौका मिलने पर वही जूता आपके किसी पसंदीदा नेता की दिशा में फेंककर प्रसिद्ध​ हो सकते है. और तो और घोडा भी जब बिदकता है तो​​​ टांग से ही​ प्रहार करता है और आदमी भी  सारे अस्त्र -​​श​स्त्र  असफल ​रहने पर लात ही मार​ता है. टांग​ की बदौलत ही आदमी ​अच्छे ​​से अच्छे​  रिश्ते ठुकरा देता है और​​​​ उसी टांग से ठोकर खाकर गिर पड़े​​​ तो अपने दांत तुडवा सकता है. तो टांग को कमजोर​ न समझें​. आप इसी पर  अच्छी​ तरह टिकें और अच्छी तरह​​​​​ टिकने के लिए दोनों टाँगे​​​​ मजबूत हों​ तो आप सौभाग्य शाली है. देश को भी दोनों टांगो (पक्ष-विपक्ष) के बीच अच्छे​ तालमेल की जरुरत है वरना एक टांग के  भरोसे रहने पर लडखडाने ​​​​की संभावना ज्यादा है. रेस में जीतने के  टांगो से तेज़ दौड़ना पड़ेगा​. टांग वहीं अडाई​​ जाये जहां आवश्यकता है. टांग अड़ाकर​ दुसरे को गिराने और उसी टांग से ठोकर खाकर गिरने में सभी का घाटा​ है. तो जनाब आप भी अपनी टाँगे मजबूत बनाएं​. टाँगे संभलकर रखें ताकि वहाँ काम ली जा सके जहाँ जरुरत है. 

​​महानुभाव की बात मेरी समझ में आ गई​. अब जब भी चलता हूँ, ​गुन्गुनाते हुए चलता हूँ ​-एय भाई! जरा देख के चलो…आगे ही नहीं पीछे भी। …. ऊपर​​ ही नहीं नीचे भी ​… ​।और कीचड का क्या? पूछ लेता हूँ फिर चिपका लेता हूँ। ।भाइयों​! यह टांग है बड़े काम की चीज़ ​…इसे बचाकर चलिये… कल काम आयगी,  कहीं अडाने में कहीं चलाने मे….:)​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​ ​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​:):)  ​

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