Monday, December 2, 2013

क्षणिका

मैं बहुत खुश था
अपनी ज़िंदगी से
ज़माने की नज़र लग गई,
मैंने इश्क कर लिया!   

Friday, November 29, 2013

सचिन को भारत रत्न पर विवाद क्यूँ? (व्यंग )


अभी हाल ही में सचिन को भारत रत्न मिलने पर कुछ बुद्धिजीवियों को असह्य  पीड़ा हुई है… सारे अखबार,फेसबुक, ब्लॉग्स आलेखों से रंग  डाले। ऐसे चुनिंदा  बुद्धिजीवी पीडितो से मैं पूछना चाहता  हुँ कि भारत रत्न अगर सचिन को  नही, तो क्या आपको मिलना चाहिए था क्या? अगर सचिन ने कुछ नही किया तो आपने ऐसा क्या  कारनामा कर डाला कि आपको मिले?? कुछ लोग कह रहे हैं कि सचिन ने खेल से पैसा कमाया है। तो आप ये बताएं कि आप कहीं भी नौकरी या व्यवसाय करते हैं, तो फ़ोकट में करते हैं क्या?? या  जिनको अब तक भारत रत्न मिले उन्होंने फ्री में सेवा की है क्या देश की ? कुछ लोगो ने कहा कि क्रिकेट  भारतीय देशी खेल नहीं है… ऐसे लोगों से मैं पूछना चाहता हूँ कि भाई साहब! आप देशी तलवारों के भरोसे जब लड़े थे ही, तो बाबर की तोपों  के सामने क्यों घुटने टेक दिए??? अंग्रेजों की गुलामी क्यों क़ुबूल कर ली??  ...अंग्रेजों की चाय तो बड़े मजे से पी लेते हैं आप…  आप स्वदेशी हैं तो कम्पुटर पर फेसबुक क्यूँ  करते हैं? चैटिंग क्यूँ करते हैं?  यह भी तो भारतीय  संस्कृति नहीं है, मशीन भारतीये नहीं है… आप स्याही और पेड़ के पत्तों पर ही लिखिए न। । और अगर आप बात करें तो क्रिकेट को छोड़कर दूसरे किस खेल में आप तीस मार खां हैं?? दूसरे खेलों में कितने मैच जीतें हैं ज़रा गिनाये तो?? ओलम्पिक में तो क्रिकेट नहीं है वहा कौनसे  झंडे गाड़ दिए आपने?  क्रिकेट में अगर अच्छा प्रदर्शन देश की टीम कर रही है तो प्रोत्साहन तो मिलना ही चाहिये ना । और अगर आप इसे राजनीति से जोड़ते हैं तो कृपया अपनी मानसिकता ऊपर  उठाइये, अगर कोंग्रेस नही देती तो भाजपा देती सचिन को भारत रत्न… क्यूंकि इस वक्त सचिन ही भारत रत्न के सर्वाधिक हकदार व्यक्तियों में से हैं, आप और मैं नहीं …और हाँ , देश में इसका विरोध जताने वालों में करोडो बुद्दिजीवी प्राणी ऐसे भी हैं, जो सचिन को भारत रत्न की घोषणा से पहले भारत रत्न के बारे में जानते भी नहीं होंगे कि आखिर भारत रत्न होता क्या है…। इस देश के लिए सबसे बड़ी विडंबना इस बात की है कि लोग जानते कुछ नही हैं और हर नयी चीज़ का विरोध कर अपने बुद्धिजीवि होने का दवा करते हैं..... चलिए आप विरोध करीय विरोध के सिवा आप कर भी क्या सकते हैं?? हाँ, आप यह कर सकते हैं कि आप भारत रत्न नहीं पा सकते और जो पा जाता है उसका विरोध कर  सकते हैं.…  तो  जताते रहिये विरोध, देश के संविधान ने  आपको अधिकार दिया है। …संविधान  द्वारा प्रदत्त कर्तव्यों की तो आप कभी बात करेंगे नहीं??? ..........              

Wednesday, November 20, 2013

पिघलते प्रश्नो पर (क्षणिका)

तेरी  आँखों से
पिघलते प्रश्नों पर
जवाब लिखा था कभी
खामियाज़ा भुगत रहा हूँ
आज तक!!!

Tuesday, November 19, 2013

अज्ञान (क्षणिका)

अज्ञान,
ज्ञान के लिए
उतना ही महत्व्पूर्ण है
जितना
अज्ञात,
ज्ञात के लिए
और शून्य,
ब्रह्माण्ड के लिए!!! 

Sunday, November 17, 2013

चलना है यारों

(वर्ष २००५ में लिखी एक कच्ची कविता जो अभी तक अधूरी है। फिर भी लुप्त होने से बचाने  के लिए पोस्ट कर रहा हूँ )

सफ़र है बहुत लम्बा
पर चलना है यारों
कोई साथ  चले न चले,
अकेले ही  कदम बढ़ाना है यारों।

समय दौड़ेगा सतत
अकेला, अमूर्त, फिर भी मजबूत
प्रहर आठ पूरे  मिले न मिले,
पर चलना है यारों।

पथ होगा पथरीला कंटीला,
लोग कहें चलना हमारी भूल
पर रेगिस्तान में गंगा लानी है तो
नंगे पैर भी चलना है यारों।

यह ठोस आधार नही कि
कोई गया नही  कभी उस तरफ
गर रचना है इतिहास तो,
प्रथम बार चलना है यारों।  

Monday, October 7, 2013

क्षणिकाएं

१. 
मुझे ऊँचाई पर चढ़ने का 
बहुत शौक था 
ऊंचाई पर पहुंचा तो पाया 
वहाँ,
"पर" काम नहीं करते!

२. 
करने वाला कुछ 
ग़लत नहीं करता 
अच्छा या बुरा यह,
ज़माना तय करता है!

३. 
अवसर देता दस्तक 
हर द्वार-हर घर 
कुछ पहचान लेते हैं 
कुछ कहते हैं,
बाद में आना!

४. 
किनारों का वजूद नदी से है 
नदी का किनारों से 
किनारे फ़र्ज़ अदा करते हैं 
नदी वक्त निकलने पर 
बिगाड़ देती है!

Thursday, August 1, 2013

​टांग थ्योरी :) (व्यंग)

​बस अभी पंद्रह मिनट पहले की ही बात है. बरसात के बाद सिन्धु घाटी सभ्यता कालीन दिखती सड़कों, जिस पर गड्ढों में पानी और कीचड जम जाता है,  मैं पैर साधते हुए और पाजामा बचाते हुए गुज़र रहा था.   तभी एक महानुभाव दुपहिया  फटफटिया फर्राटे से दौडाते हुए निकल  गये, मानो शोएब अख्तर से तेज़ सड़क पर उड़ना  चाहते हों. विज्ञान के सिद्धांत के मुताबिक  कीचड उछलकर मेरे एक पैर के पायजामे पर  काले रंग से दुनिया के छोटे बड़े देशों  के मानचित्र बना  गया . एक पैर की सफेदी और दुसरे पैर की रंगीन पिच को देख दस कदम दूर खड़े होकर  वही महानुभाव  मंद-मंद मंदबुद्धि जीव की तरह मुस्कुरा रहे  थे. मुस्कुराएंगे भी क्यूँ नहीं?  दूसरों पर कीचड उछालने   में आनंद लेना  तो मानव का प्रथम मौलिक कर्तव्य है. 
​ मैंने उसकी जले पर नमक छिड़कती हंसी पर आत्म नियंत्रण करते हुए उनसे पूछ ही लिया-बंधू! आपने मेरी एक ही तो टांग खराब  की है, दूसरी भी सलामत है और पूरा बदन  भी. फिर सिर्फ एक टांग पर ही जिद्दी दाग लगाकर क्यूँ मुस्कुरा रहे हो?

​महानुभाव ने फ़रमाया-जनाब! मैं आपकी टांग की दुर्दशा पर नहीं, टांग थ्योरी पर मुस्कुरा रहा हूँ. आप भी सुनेंगे  तो गुस्सा  थूंक ​देंगे।  मैंने कहा- फरमाइए! क्यों  न शुरुआत आप ही से की जाए !​ महानुभाव बोले  -जनाब !टांग थ्योरी पवार का प्रतीक है. जिसकी जितनी मजबूत  टांग वह उतना ही पावरफुल। अगर आपकी टांग मजबूत है तो आप कहीं भी टांग अड़ा सकते हैं. अच्छे -   खासे धावक को गिरा सकते हैं. जो आपसे पीछे है उसे टांग लगाकर  रोक सकते ​हैं. टांग  की बदौलत ही ओलम्पिक जैसे नामी  खेलों में पदक जीते जाते है. टांग से ही क्रिकेट में नो बॉल फेंककर आप मैच गंवा सकते  है. आपकी एक टांग न हो तो विकलांग का दर्जा  पाकर अच्छी नौकरी पा सकते है. टांग उचित आकर की हो तो ब्रांडेड जूता पहन सकते हैं और मौका मिलने पर वही जूता आपके किसी पसंदीदा नेता की दिशा में फेंककर प्रसिद्ध हो सकते है. और तो और घोडा भी जब बिदकता है तो टांग से ही प्रहार करता है और आदमी भी  सारे अस्त्र -​शस्त्र  असफल रहने पर लात ही मारता है. टांग की बदौलत ही आदमी अच्छे से अच्छे​  रिश्ते ठुकरा देता है और उसी टांग से ठोकर खाकर गिर पड़े तो अपने दांत तुडवा सकता है. तो टांग को कमजोर न समझें. आप इसी पर  अच्छी तरह टिकें और अच्छी तरह टिकने के लिए दोनों टाँगे मजबूत हों तो आप सौभाग्य शाली है. देश को भी दोनों टांगो (पक्ष-विपक्ष) के बीच अच्छे तालमेल की जरुरत है वरना एक टांग के  भरोसे रहने पर लडखडाने की संभावना ज्यादा है. रेस में जीतने के  टांगो से तेज़ दौड़ना पड़ेगा. टांग वहीं अडाई जाये जहां आवश्यकता है. टांग अड़ाकर दुसरे को गिराने और उसी टांग से ठोकर खाकर गिरने में सभी का घाटा है. तो जनाब आप भी अपनी टाँगे मजबूत बनाएं. टाँगे संभलकर रखें ताकि वहाँ काम ली जा सके जहाँ जरुरत है. 

​महानुभाव की बात मेरी समझ में आ गई. अब जब भी चलता हूँ, गुन्गुनाते हुए चलता हूँ -एय भाई! जरा देख के चलो…आगे ही नहीं पीछे भी। …. ऊपर ही नहीं नीचे भी … ।और कीचड का क्या? पूछ लेता हूँ फिर चिपका लेता हूँ। ।भाइयों! यह टांग है बड़े काम की चीज़ …इसे बचाकर चलिये… कल काम आयगी,  कहीं अडाने में कहीं चलाने मे….:) ​:):)