Wednesday, September 1, 2010

जश्न, शर्त, ग़ज़ल, बादलों की जरुरत, क़र्ज़

1.  जश्न

मैं
हर उस ख़ुशी का
जश्न मनाने से डरता हूं
जिसे
खोना नहीं चाहता...!!!


२.   शर्त

तू कहे तो
मैं अपनी
हर ख़ुशी पर
तेरा नाम लिख दूँ,
शर्त यह है
कि तू
तेरे किसी गम में
मुझे
भागीदार बना ले..!!!


३.   ग़ज़ल

चाहता हूं
तेरी हर अदा पर
ग़ज़ल कहूँ
मगर मेरे लफ़्ज़ों में,
तुझ जैसी खूबसूरती कहाँ..!!!


४. बादलों की जरुरत

भोर की
पहली किरण के साथ ही
आज देखली सबने
तेरे गेसुओं की घटाएं,
तो बरसने के लिए
बादलों की
कहाँ जरुरत है भला...!!!


५. क़र्ज़

तेरे लबों से
मांगी थी उधार
थोड़ी सी मुस्कुराहट
आज तक
अदा नहीं कर पाया,
ब्याज भी
तेरे क़र्ज़ का....!!!

23 comments:

  1. तेरे लबों से
    मांगी थी उधार
    थोड़ी सी मुस्कुराहट
    आज तक
    अदा नहीं कर पाया,
    ब्याज भी
    तेरे क़र्ज़ का....!!!

    बढिया..

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  2. सारी क्षणिकाएं बहुत अच्छी हैं ...एक से बढ़ कर एक ...


    .तू कहे तो
    मैं अपनी
    हर ख़ुशी पर
    तेरा नाम लिख दूँ,
    शर्त यह है
    कि तू
    तेरे किसी गम में
    मुझे
    भागीदार बना ले..!!!
    यह बहुत पसंद आई ...

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  3. आपको एवं आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !
    बहुत बढ़िया ! उम्दा प्रस्तुती!

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  4. bahut badiya devendra babu
    apne to hemesha ki tarah kamal hi likha he

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  5. सारी क्षणिकाएं बहुत अच्छी हैं

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  6. आपको और आपके परिवार को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  7. ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.

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  8. देवेन्द्र बाबू,
    सारे के सारे टू गुड़!
    मज़ा आ गया!
    --
    अब मैं ट्विटर पे भी!
    https://twitter.com/professorashish

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  9. sharma ji

    ab tak aapki ahsason se door rahe is baat ka afsosh hai

    javab nahi laajavab ........har lihaaj se

    shabd ,bunaai abhivyakti, saralta,marm ,bhaav

    speechless
    awaysome creations ...kisi ek pankti mein aapke lekhan ki tariif mumkin nahii

    .............
    khushnasibii aapne mere bikhre hue shabdo ko saraha or khaksaar ki hausla_afzaaii kii

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  10. चाहता हूं
    तेरी हर अदा पर
    ग़ज़ल कहूँ
    मगर मेरे लफ़्ज़ों में,
    तुझ जैसी खूबसूरती कहाँ..

    ऐसा नही है की आपके लफ़्ज़ों में खूबसूरती नही है .... ये आपका जबरदस्त अंदाज़ है जो इसे और भी खूबसूरत बना रहा है ....

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  11. sabhi kshnikaye mast he.
    aisa lagta he jaise kisi ko shiddat se chaha he tene.
    keep writting.
    abhi to tujhe time bhi bahut milta he.

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  12. waah har ek shabd ki acchhi defination di hai.
    bahut hi khoobsurat prayas.

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  13. चाहता हूं
    तेरी हर अदा पर
    ग़ज़ल कहूँ
    मगर मेरे लफ़्ज़ों में,
    तुझ जैसी खूबसूरती कहाँ..!!!

    bahut hi sunder rachna....

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  14. उम्दा प्रस्तुती

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  15. भगवान श्री गणेश आपको एवं आपके परिवार को सुख-स्मृद्धि प्रदान करें! गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें!

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  16. सुंदर प्रस्तुति.
    यहाँ भी पधारें:-
    अकेला कलम...

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  17. वाह वाह - एक से बढ़कर एक - लाजवाब - हार्दिक बधाई

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  18. Sochta hu teri har Kshanika ki daad du per teri Kshanika main wo baat kahan ...................
    ...................................

    Just kidding dude, i think you are free for quite sometime

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  19. Hey buddy I think your writing has evolved tremendously. They are awesome poetry and some of them are really delightful. Good work keep it up …………

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  20. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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  21. ये बेहद पसंद आईं।
    ..बधाई।

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  22. मैं
    हर उस ख़ुशी का
    जश्न मनाने से डरता हूं
    जिसे
    खोना नहीं चाहता...!!!

    saransh likhte ho
    tabiyat khush kar dii aapne to brother ,ab tak aapke blog se door rahe afsosh hai

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