Thursday, June 16, 2011

तेरी बेवफाई, दो आंसू, सुरमा, टुकड़े

१.तेरी बेवफाई

तेरी बेवफाई
भिगो देती है रोज़
दिल को आंसुओं से
अच्छा है, हर दिन
धड़कने को मिल जाता है 
एक नया दिल!!!
  

२. दो आंसू

गैरों को भी अपना
समझ लेते हैं
गर कोई बहा दे
दो आंसू
झूंठे ही सही!!!

३. सुरमा

सुबह से सूरज
कहीं नज़र नहीं आया
तुमने आँखों में
सुरमा लगा लिया था क्या..!!!

४. टुकड़े

आज फिर तकरार हुई
कुछ टुकड़े तुमने किये
कुछ मैंने
खुदा दिल शीशे का क्यूँ बनाता है..!!           
    

13 comments:

  1. Loved the last one...
    knowingly or unknowingly we hurt so many people and tragedy is we don't even realize !!!

    Nice write-ups.

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  2. KIDHAR SE YE SAB KHOJ KE LAATA HAI.... VERY NOCE

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  3. बहुत सुन्दर क्षणिकाएँ ...सुरमा ..बहुत बढ़िया लगी ..

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  4. दिल को छू लेने वाले हैं सभी शब्दचित्र!

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  5. प्रेम रस में सराबोर ,सभी क्षणिकाएं बेजोड़

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  6. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 21 - 06 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच-- 51 ..चर्चा मंच

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  7. वाह .. हर क्षणिका बेहद लाजवाब .. और सुरमे का तो जवाब नहीं ...

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  8. बहुत सुन्दर क्षणिकाएं .पहली बाली खास अच्छी लगी.

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  9. वाह ... बहुत ही सुन्‍दर क्षणिकाएं ..बेहतरीन ।

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  10. बेहतरीन प्रस्तुति....!!

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  11. BOSS DK

    सुबह से सूरज
    कहीं नज़र नहीं आया
    तुमने आँखों में
    सुरमा लगा लिया था क्या..!!! Nahi tumahari aankhe foot gayi lagta he

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