Friday, February 4, 2011

नाचती बोतल, ऐ साकी, नशा, महखाना

१. नाचती बोतल

कल एक
शराब की बोतल को
नाचते हुए देखा था
नहीं पता
उसने पी थी कि नहीं
मगर उस पर चढ़ी दीवानगी
जता रही थी कि
जरुर पिया होगा उसने
कोई गम का घूँट....!!!


२. ऐ साकी

ऐ साकी,
तू सभी को
पिला पिलाकर शराब
अब बूढी हो चली है
गर तुझे फिर जवान होना है
तो आ
बैठ मेरे साथ
लबों से लब मिलाकर
दर्द पी.....!!!


३. नशा

तेरे आर्द्र होंठ
होठों पर मुस्कराहट की शबनम
शबनम पर चढ़ी शराब
इस नशे में भला
कौन नहीं डूबना चाहेगा...!!!

४. महखाना

कल महखाने में
भीड़ बहुत थी
वो भी आये थे
जिन्हें नहीं पीने का शौक
नशा खुद बेहोश था
पूरा मदिरालय मदहोश था
पर मैं पी रहा था
साकी के हाथों से छीनकर
अश्क,
शराब की जगह...!!!

1 comment:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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