Wednesday, September 14, 2011

राष्ट्रीय एकता


हम दावा करते हैं
ग्लोबल होने का

बड़ी बड़ी बातें करते हैं
देश की विदेश की
विश्वस्तरीय भाषा
सभ्यता और संस्कृति की.

बताते हैं अनेकता में एकता
राष्ट्रीय एकता.

परन्तु यथार्थ में
होने के बावजूद,
इक्कीसवीं सदी के

नाम जताने के पश्चात
अक्सर यही प्रश्न होते हैं
किस जाति के हो?
किस धर्म के हो?
किस राज्य के हो???



17 comments:

  1. आपके प्रश्न सार्थक और विचारणीय हैं.
    राष्ट्रीय एकता के सही मायने समझने होंगें
    हम सभी को.

    बहुत दिनों से आप मेरे ब्लॉग पर नहीं आयें हैं.
    समय मिलने पर दर्शन दीजियेगा.

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  2. बढ़िया कविता.... विचारनीय प्रश्न

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  3. बहुत बहुत बधाई ||
    खूबसूरत प्रस्तुति ||

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  4. सही कहा ..बिलकुल .

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  5. हाँ टूटा हुआ तो यह पूरा संसार है... शायद महा-प्रलय में ही एक होंगे...

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  6. शुभकामनाये बृहद सोच को समेटने के लियी ,
    " बदल जाएगी धरा अगर तुम खड़े हो गए......"

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. नाम जताने के पश्चात
    अक्सर यही प्रश्न होते हैं
    किस जाति के हो?
    किस धर्म के हो?
    किस राज्य के हो???.......

    Exactly we behave like educated-illiterates :D

    Nice read.

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  9. सच है , इन प्रश्नों पर अच्छा प्रश्न उठाया आपने …


    आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  10. need to ask to know that .............
    Ektaa badhi ki nahi badhi AUR badhi to kiske saath badhi hai :-)

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  11. kuch baat to hogi akhir in savalon m bhi ..

    नाम जताने के पश्चात
    अक्सर यही प्रश्न होते हैं
    किस जाति के हो?
    किस धर्म के हो?
    किस राज्य के हो???.......

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  12. शायद यह मूलभूत स्वाभाव का हिस्सा है कि ये प्रश्न अनायास उठ जाते है... निश्चित ही स्थिति बदलनी चाहिए... हमारी सोच का दायरा वृहद होना चाहिए!

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  13. bahut achha kaha aapne :)

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  14. Kya bakwas kavita hai . Isko koi kavita kayese kah sakte hai .

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    1. If you can find fault in other`s poems , why can`t you write your own poems . Stupid !

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